देख तेरे अस्पताल की हालत क्या हो गई भगवान…


नीलू चौबे
आज श्री बंशीधर नगर के लोग यह सोचने को विवश हैं कि हे भगवान अनुमंडल अस्पताल की क्या हालत हो गई है? सरकार आम अवाम को सुविधा दे रही है और प्रबंधन उस सुविधा में डंडी क्यों मार रहा है?इसका जब हम जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं तो मालूम पड़ता है कि अनुमंडल अस्पताल प्रबंधन ने पिछली गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा है और न ही सुधार की दिशा में कोई क्रांतिकारी कदम उठाये हैं। अलबत्ता प्रबंधन ने गलतियों पर पर्दा डालने में अपना समय जाया कर खुद की किरकिरी कराई है।
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन पिछली गलतियों से सबक लेते हुए उसमे सुधार करने के बजाय गलतियों पर पर्दा डालने में की कोशिशों में जुट गया है। अस्पताल में गड़बड़ी न हो इस पर ध्यान देने की जगह अस्पताल में व्याप्त गड़बड़ियां बाहर न जाय इस पर वहां तेजी से काम चल रहा है। अस्पताल में बाहरी और अनाड़ी नर्स और कंपाउंडर महिलाओं का ऑपरेशन कर चले गए, अस्पताल प्रबंधन उन्हें ऐसा करने से रोकने में नाकामयाब रहा।
जब बंशीधर न्यूज ने व्यापक जनहित में इसे सरकार, प्रशासन और जनता के बीच में लाकर अपनी सकारात्मक जिम्मेदारी निभाई तो अस्पताल प्रबंधन ने अनाड़ी लोगों पर एफआईआर करने तथा उन्हें कड़ी सजा दिलाने की दिशा में कदम उठाने के बजाय इस कड़वा सच को सामने लाने से रोकने की दिशा में कदम उठाने में कुछ अधिक ध्यान दे रहा है। जो बेहद शर्मनाक और जनविरोधी कुकृत्य है।
वैसे श्री बंशीधर नगर अनुमंडल गढ़वा जिले का अजूबा अस्पताल है। यहां प्रबंधन के तमाम फैसले हैरत में डालने वाले हैं। दवा क्रय का फैसला हो या बेहतर प्रबंधन का, तत्संबंधी फैसलों पर गौर करें तो हैरानी होगी। इन बातों पर बाद में बिंदुवार हम अपनी बातों को सबके समक्ष रखेंगे और प्रमाण सहित बड़ा खुलासा करेंगे।
फिलहाल हम अस्पताल प्रबंधन के द्वारा लिए गए ताजा फैसले की चर्चा करना जरूरी समझते हैं। अस्पताल प्रबंधन यहां व्यवस्था में सुधार हो इस पर ध्यान देने की जगह इस व्यवस्था के खिलाफ किसी ने आवाज उठा दी तो उसके अस्पताल में घुसने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की नाकाम कोशिश की है।
अभी अस्पताल में व्याप्त गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर, जनरल वार्ड, कार्यालय आदि में अनाधिकार प्रवेश निषेध का नोटिस चस्पा कर दिया है। यह नोटिस खासकर मीडिया के लिए लगाये गये हैं। यह नोटिस भी उस समय लगाया गया जब अस्पताल की आपराधिक कारगुजारी अस्पताल से बाहर निकली और अखबारों की सुर्खियां बनी। मामला प्रकाश में आने के बाद प्रबंधन को व्यवस्था में सुधार कर नजीर पेश करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं कर मीडिया पर निगहबानी की नापाक कोशिश की जा रही है।
अस्पताल में कतिपय मीडिया के लोगों पर नजर रखी जा रही है। वैसे मीडिया के लोगों के अस्पताल में घुसते ही एक गार्ड पीछे पीछे नजर रख रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि मीडिया के समक्ष कोई अपना मुंह नहीं खोले। क्योंकि मीडिया के समक्ष लोग तभी बोलते हैं, जब उन्हें लगता है कि उनकी बात लीक भी नहीं होगी और मामला उचित स्थान तक पहुंच जायेगी। अब मीडिया के लोग के पीछे गार्ड खड़े होने पर लोग खुलकर अपनी व्यथा कथा का बयान नहीं कर पा रहे हैं।
मतलब साफ है कि अस्पताल में फिलहाल आम आदमी की आवाज को दबाने की मुकम्मल कोशिश की जा रही है। लेकिन एक बात हम स्पष्ट कर रहे हैं कि हम तो अंत्योदय को लक्ष्य बनाकर आम आदमी की व्यथा कथा को सबके सामने लाने की ईमानदार कोशिश कर रहे हैं। जो हमारा धर्म है और कर्तव्य भी। अस्पताल में फिलहाल जो हो रहा है इसके बावजूद भी हम सभी क्षेत्रों में आगे भी निरंतर गतिशील रहकर अपने इस धर्म और कर्तव्य का बिना किसी भय अनुराग या द्वेष के पालन करते रहेंगे। और इस तरह के अघोषित प्रतिबंध से भी अंदर की बात बाहर लाने में मुझे कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि हमने जनहित के मुद्दों को लेकर कभी किसी के आगे हथियार नहीं डाला है। पर हां किसी ने अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर गलतियों में सुधार किया है, तो उसके बेहतर कार्यों को भी जनमानस के बीच लाने की कोशिश की है।

 

(पलामू प्रमंडल की ख़बरों के लिए बंशीधर न्यूज़ मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

शेयर करें