धर्म संस्कृति और संत महात्माओं को क्षति पहुंचाने वाले का विनाश हो जाता है : जीयर स्वामी जी


प्रयागराज : श्री श्री 1008 श्री लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज ने कहा कि शास्त्र में वर्णित है कि जो विषपान करेगा, हलाहल पियेगा वही मरेगा। परंतु धर्म, संस्कृति, संत, महात्मा सदाचारी व्यक्ति को यदि कोई किसी प्रकार से परेशान करता है या कष्ट देता है। उसके साथ गलत व्यवहार करता है, तो केवल उस व्यक्ति का ही नही बल्कि उसके कुल खानदान का ह्रास हो जाता है। विनाश हो जाता है। स्वामीजी महाराज प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र में श्री त्रिदंडी देव समाधि स्थल चरित्रवन बक्सर की ओर से आयोजित शिविर में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भगवान ने स्पष्ट कहा है कि पढ़ा हो या नही पढ़ा हो, सदाचारी, संत, महात्मा, ज्ञानी, विद्वान हो, विप्र हो उसका शरीर हमारा शरीर है। उसके लिए अंतिम तक प्रयास करता हूं। क्योंकि महापुरूषों के चरणों में पूरी दुनिया के तीर्थ और सारे व्रत होते हैं।

पुरूषार्थी व्यक्ति को अंतिम क्षण तक प्रयास करना चाहिए
पुरूषार्थी व्यक्ति को अपने जीवन के अंतिम क्षण तक कभी भी अपने पुरूषार्थ का त्याग नही करना चाहिए। हमारा पुरूषार्थ, हमारा कर्म, हमारा उद्देश्य ही सफलता का कारण बनता है। सफलता की जननी बनता है।

शंकर का मतलब होता है जो कल्याण करे
शंकर का मतलब होता है जो कल्याण ही कल्याण करे। भगवान शंकर के समान ऐसा कोई नही है। धतूरा चढा दिए तो भी खुश, बेल पत्र, गंगाजल चढ़ा दिए तो भी खुश। नाराज नही होते। इतने बड़े हैं यही तो कारण है। आज कल लोग भगवान शंकर को साक्षी मानकर गलत काम कर रहे हैं। इनके नाम पर गांजा, भांग इत्यादि का सेवन कर रहे हैं। अपने से लोग लाइसेंस लेकर गांजा, भांग शराब का सेवन करते हैं। कहते हैं भगवान शंकर का भक्त हैं। शंकर जी, भैरव जी और काली जी के नाम पर, गलत काम करना अच्छी बात नही है।

वैदिक परंपरा को तोड़ने मरोड़ने का अधिकार किसी को नही
वैदिक परम्परा पर कुठाराघात पर करचा करते हुए उन्होंने कहा कि आज लोग ऊँ हटाकर भगवान शिव को गुरू बनाते हैं। वैदिक परंपरा को तोड़ मरोड़ करने का आपको कौन अधिकार दिया है। मनमाने ढंग से जीवन जीने के लिए, मनमाने ढंग से खान पान उठन बैठन के लिए आपने अपने मन से शंकर जी के मंत्र से ऊँ हटा दिया। ऐसा ठीक नही है। धर्म कीजिए परंतु धर्म के नाम पर इधर-उधर भटकने की कोशिश मत कीजिए। अधर्म करने के लिए धर्म की छत्रछाया डाल दिया जाए यह अच्छी बात नही है। धर्म के नाम पर भटकाव की बात आती है अच्छी बात नही है। स्वामीजी महाराज ने कहा कि धर्म कभी भी हमें गलत मार्ग पर चलने की आज्ञा नही देता।

 

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