गढ़वा में शिक्षा विभाग का कमाल, बिना नियुक्ति पत्र के ही हाईस्कूल के शिक्षकों का कराया योगदान




गढ़वा : गढ़वा अजूबा जिला है। यहां शिक्षा विभाग में पोस्टेड अफसरों का खेल भी निराला होता है। फिलहाल शिक्षा विभाग ने नया कमाल कर दिखाया है। विभाग ने बिना नियुक्ति पत्र के ही हाईस्कूल के शिक्षकों का योगदान करा लिया है। योगदान के बाद चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है, जिससे जिले में नवचयनित हाईस्कूल के 185 शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है। जिला प्रशासन एवं विभाग की उदासीनता के कारण सभी नवचयनित शिक्षकों की स्थिति त्रिशंकु जैसी हो गई है लिहाजा वे लोग किंकर्तव्यविमूढ़ बने हुए हैं। वे अपने भविष्य के प्रति पूरी तरह सशंकित हैं। शिक्षा विभाग ने बगैर नियुक्ति पत्र के ही शिक्षकों का योगदान करा लिया है। साथ ही नौ मार्च से उनकी उपस्थिति भी बनने लगी है। बगैर नियुक्त पत्र के योगदान कराने का शिक्षा विभाग का यह कारनामा आश्चर्य एवं चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिक्षा विभाग की अदूरदर्शिता एवं लापरवाही का आलम यह है कि बगैर नियुक्ति पत्र के ही शिक्षकों का योगदान कराकर उपस्थिति बनवायी जा रही है। सूत्रों के अनुसार इन्हें चुनाव कार्य में भी लगाए जाने की तैयारी चल रही है। विभागीय सूत्र के अनुसार जिले में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, कुरमाली आदि विषयों के 185 शिक्षकों का हाई स्कूल के लिए चयन किया गया है। इनमें से निर्धारित तिथि तक 175 ने काउंसिलिंग कराया। 10 अनुपस्थित रहे। अब काउंसिलिंग के बाद विभाग ने किसी को नियुक्ति पत्र नहीं दिया। इन्हें बगैर नियुक्ति पत्र के ही योगदान का मौखिक आदेश पर योगदान कराया गया। 175 में 133 ने योगदान कर लिया। साथ ही नौ मार्च से इनकी उपस्थिति भी बनवायी जा रही है। जबकि 42 ने योगदान नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार योगदान नहीं देने वालों में वैसे लोग शामिल हैं जो किसी अन्य विभाग में कार्यरत हैं। अब बगैर नियुक्ति पत्र के वे अपनी पुरानी नौकरी न तो छोड़ सकते हैं और न ही नई नौकरी में योगदान कर सकते हैं। इनके समक्ष पेंडूलम वाली स्थिति उत्पन्न हो गई है। विभाग की ओर से नियुक्ति पत्र के संबंध में इन्हें कोई ठोस जबाब नहीं मिल रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या बगैर नियुक्ति पत्र के योगदान करना वैध है? जानकार इसका जबाब नहीं में देते हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी अभय शंकर से संपर्क करने का प्रयास किया गया परंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जबकि डीसी से प्रयास के बावजूद संपर्क स्थापित नहीं हो सका।

 

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