भगवान को याद करना सच्ची संपत्ति है और उनको भूल जाना सबसे बड़ी विपत्ति है : श्रीधराचार्य जी




श्री बंशीधर नगर : श्री श्री 1008 जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान को याद करना सच्ची संपत्ति है और उनको भूल जाना सबसे बड़ी विपत्ति है। वह चित्तविश्राम गांव में स्थित शिवमंदिर के प्रांगण में आयोजित श्रीमदभागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होनें कहा कि थोड़ा सुख पाने के लिये नहीं बल्कि ब्रम्हानंद सुख पानें के लिये मानव शरीर प्राप्त हुआ है। श्रीधराचार्य जी महाराज ने कहा कि सारे लोग दुनिया की ठोकर खानें के बाद भगवान की शरण में जाते हैं। किंतु धन्य हैं वो लोग जो दुनियां की ठोकर खानें से पहले ही भगवान की शरण में पहुंच जाते हैं। जिस दिन-हीन व्यक्ति को सारी दुनियां ठुकरा देती है उसको भी करुणानिधान दीनबंधु शरण में आने पर अपना लेते हैं। उन्होनें ध्रुव की कथा सुनाई ओर बताया कि उन्होनें अपनें तप और भक्ति की वजह से सिर्फ 5 वर्ष की अल्प आयु में भगवान श्री हरि को पा लिया था। जिन्होनें 36 हजार वर्ष तक राज्य संभाला था। उन्होनें ने बताया कि ध्रुव को लेने पृथ्वी पर स्वंय मृत्यु आई और ध्रुव जी से बोली हे प्रभु आपका चरण मेरे सिर पे पड़ जाये तो मैं मृत्यु भी तर जाऊं। तब जाकर ध्रुव जी मृत्यु के सर पे अपना चरण रखते हैं और अपने धाम को जाते हैं जो आज भी अमर हैं और ब्रह्मांड में ध्रुव तारा के नाम से जाने जाते हैं। उस मौके पर कन्हैया चौबे, श्रीकांत मिश्रा, वीरेन्द्र पांडेय, राजू पांडेय, यमुना सेठ, उदयकांत पांडेय, शालिग्राम पांडेय, दयानंद पांडेय, मिंटू पांडेय, लालमणि पांडेय, चंदन पांडेय समेत बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने कथा का श्रवण किया।

 

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