हिन्दू जागरण मंच की योजना बैठक




गढ़वा: हिन्दू जागरण मंच की योजना बैठक आरकेवीएस बीएड कॉलेज गढ़वा में की गई। बैठक में क्षेत्र संगठन मंत्री डा. सुमन ने कई खंडों के कार्यकर्ताओं ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि अपना देश विश्वगुरू था। इसकी श्रेष्ठ परंपरा और संस्कृति जनकल्याण वाली है। जिसके बदौलत भारत संपूर्ण विश्व को जीवन जीने की कला सिखाता था। मानवीय गुणों के विकास को धरातल पर उतारता था परंतु वर्चस्व की पाश्यचात सोंच ने भारत की इस महान कृृृति को छिन्न भिन्न करने का प्रयास शुरू कर दिया। धर्म, संप्रदाय, जाति के आधार पर भारतवासियों के अटृूट प्रेम बंधन को तोड़ने का प्रयास किया गया। भाारत पर क ई आक्रमण हुए। दुनिया को शांति का संदेश देने वाला अपना यह देश तबाह हो गया। इसी का परिणाम है कि आज संपूर्ण विश्व हिंसा की आग में जल रहा है। हथियारों का प्रदर्शन और आतंकवाद प्राय: सभी देशों को अपने जद में लेने क ो बेताब है।
काफी मंथन एवं प्रयोगों के 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कर पुन: विश्व को शांति प्रदान करने एवं भाई बंधुत्व की भावना को बढ़ाने के लिए वातावरण बनाया जा रहा है।भारतीय संस्कृति और ज्ञान को न सिर्फ भारत बल्कि विश्वके कई देशों में बढ़ाया जा रहा है, ताकि फिर से अमल और चैन कायम किया जा सके। इसके लिए सबसे जरूरी है कि भारत आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से सबल बने।
जानें कौन हैं डॉ सुमन
डा. सुमन का पूर्व नाम डॉ रोबर्ट सॉलोमन है। वह मूल रूप से इंडोनेशिया जकार्ता के रहने वाले हैं। आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लंदन से पास आउट करने के बाद 1987 तक चर्च व मिशनरियों के पादरी के नाते कार्य करते थे और चर्च के मूल एजेंडा धर्मान्तरण में सलंग्न थे। 23 हजार हिंदुओं को धर्मान्तरित कराके इसाई बना चुके थे। 1987 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को देखने, समझने और इनके गतिविधियों को जानने के लिए अंतरराष्ट्रीय मिशनरियों व चर्च द्वारा भारत भेजा गया था। वह भारतीय चिंतन, भारतीय दर्शन यहां के रीति-रिवाज, रंग, परिपाटी, त्योहार को न तो जानते थे और न ही मानते थे। लेकिन भारतभूमि में आने के बाद विश्व के अद्वितीय स्वयं सेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सेवा कार्य और भारतभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा को देखते हुए, संघ के कार्यों से प्रभावित होकर तथा दुनिया के सबसे उदार और सहिष्णु हिन्दू दर्शन, हिन्दू चिंतन और स्वामी विवेकानंद के जीवन साहित्य से बड़े गहरे रूप से प्रेरित हुए। वह पादरी पद से रिजाइन देकर 1989 में मतांतरित होकर और आर्य समाज पद्धति से हिन्दू सनातन धर्म को अंगीकार कर लिया। प्रारम्भ में संघ के स्वयंसेवक रहते हुए जीवन में आजीवन अविवाहित रहने का वीरव्रत लिया और पूरा जीवन इस तपोभूमि को समर्पित करते हुए संघ के प्रचारक बने और वर्तमान में हिन्दू जागरण मंच के झारखण्ड-बिहार क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में कार्यशील हैं।

 

(पलामू प्रमंडल की ख़बरों के लिए बंशीधर न्यूज़ मोबाइल ऐप डाउनलोड करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

शेयर करें