सुंदर शहर की सड़क पर मवेशियों की मटरगस्ती सड़क पर बैठे मवेशियों से ट्रैफिक व्यवस्था हो रही प्रभावित




मेदिनीनगर : नगर निगम मुख्यालय मेदिनीनगर शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाये जाने की कवायद चल रही है। अन्य शहरों से अलग अपना शहर सुंदर दिखे, इसके लिए शहर के सरकारी व गैर सरकारी भवनों के अहाते ही नहीं पेड-पौधों पर भी चित्रकारी की जा रही है। शहर की सड़कों को चकाचक करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सुंदर शहर की सड़क पर होने वाले मवेशियों की मटरगस्ती को रोकने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है। इससे न सिर्फ शहर की सड़कों पर गंदगी फैलती है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इतना ही नहीं सड़क के बीचोबीच खड़े या बैठे मवेशियों के कारण शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। हालांकि सड़क पर आवारा मवेशियों की मटरगस्ती कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से सड़क पर मवेशियों का उत्पात चल रहा है। हाल के दिनों में सड़क पर आवारा घुमने वाले मवेशियों की संख्या बड़ी है। दिन के उजाले में भी सड़क पर खड़े या विचरण करते दुधारू व बिना दुधारू गाय के साथ बछड़ों व सांढों को सरेआम देखा जाता है। इसके बावजूद इस पर अंकुश लगाने की आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। विश्वस्तों की माने तो सड़क पर घुमने वाले मवेशी शहर के ही लोगों द्वारा पाले गए होते हैं। संबंधित गाय पालकों द्वारा गाय के दुध का न सिर्फ उपयोग किया जाता है बल्कि व्यवसाय भी करते हैं। जिसके बाद अपनी गाय को सड़क पर खुले छोड़ दिया जाता है। गौरतलब हो कि शहर के पुलिस लाईन से छहमुहान तक हर दिन सुबह दोपहर हो या शाम सड़क पर विचरण करते आवागमन प्रभावित करने वाले दजर्नाधिक मवेशियों को देखा जा सकता है। कभी-कभार सड़क पर लावारिस घुमते मवेशी आपस में लड़ने लगते हैं और आने-जाने वाले छोटे-बड़े वाहनां से टकराते हैं। इससे अक्सर दुर्घटनाएं होती है और इसमें न सिर्फ वाहन चालक बल्कि मवेशियों को भी चोटे लगती है। विडंबना तो यह है कि शहर की सड़क पर खुलेआम घुमने वाले मवेशियों को छेड़ने का प्रयास भी कई मामलों में लोगों को महंगा पड़ने का डर रहता है। इसलिए कोई मवेशियों को हटाने का भी प्रयास नहीं करता। जानकारों की माने तो शहर को खुबसूरत बनाने के लिए अन्य कार्यों के साथ-साथ नगर निगम या जिला प्रशासन को शहर की सड़क को मवेशियों की मटरगस्ती से बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करना होगा। इसके लिए शहर के संबंधित पशुपालकों को पहले नोटिस उसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था करनी होगी। क्योंकि शहर के पशुपालकों में जब तक कानून या प्रशासन का डर नहीं होगा तब तक सड़क पर मवेशियों की मटरगस्ती कम नहीं होगी। आम शहरियों की माने तो मुख्य सड़क पर तो मवेशियों की भीड़ कम होती है, मुख्य सड़क से हटकर बाजार की ओर खासकर सब्जी बाजार की ओर रूख करे तो आने-जाने वाले ही नहीं सब्जी की दुकान लगाने वाले या ठेला पर फल बेचने वाले छोटे दुकानदार इन लावारिस मवेशियों से दिनभर परेशान रहते हैं। हेरत तो यह है कि बाजार के नाम पर टेक्स वसूलने वाली संस्थानों को भी इन छोटे दुकानदारों की परेशानी और सुविधा का कोई ख्याल नहीं है।

 

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