एकता और भाइचारे की मिसाल है पलामू की रामनवमी



  

मेदिनीनगर : झारखंड के पलामू जिले में हर वर्ष रामनवमी एकता और भाइचारे का संदेश लेकर आती है। ऐसा इसलिए होता है कि हर वर्ष रामनवमी में नवमी के जुलूस का स्वागत मुसलमान भाई करते हैं। पगड़ी बांधकर जुलूस के नेतृत्वकर्ता महावीर नवयुवक दल जेनरल के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का स्वागत किया जाता है। इसके गवाह जनप्रतिनिधि और जिले के प्रशासनिक अधिकारी बनते हैं। गले मिलकर एक दूसरे को पर्व की बधाई दी जाती है। 50-60 वर्ष से चली आ रही परंपरा यह परंपरा कोई नयी नहीं है। पिछले छह दशक से यह सिलसिला चलता आ रहा है। रामनवमी के मौके पर जहां मुहर्रम इंतजामिया कमिटी नवमी के जुलूस का स्वागत करती हैं तो मुहर्रम में महावीर नवयुवक दल (जेनरल) मुहर्रम इंतजामिया के खलीफा और उनके पदधारियों का अभिनंदन करता है। इस कार्यक्रम को लेकर हर वर्ष दोनों समुदायों में खासा उत्साह देखा जाता है। रामनवमी और मुहर्रम जुलूस के शहर के छहमुमान पहुंचने से पूर्व दोनों समुदाय क्रमशः रामनवमी और मुहर्रम में अभिनंदन समारोह की तैयारियों में जुट जाते हैं। छहमुहान पर जुलूस के पहुंचने पर अभिनंदन किया जाता है और फिर उनकी अगुवानी कर कार्यक्रम स्थल तक लाया जाता है। ऐसी परंपरा की शुरूआत करने के पीछे एक मात्र मकसद शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना है। लंबे समय पहले शहर के कुछ अमनपसंद लोगों ने इस नयी परंपरा की शुरूआत की और यह आगे चलकर दोनों समुदायों के मिल्लत के लिए एक मील का पत्थर बन गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से इस कार्यक्रम को और अधिक बल मिला। इस कार्यक्रम की ही देन है कि पलामू जिले में जब कभी महौल खराब करने की कोशिश की गयी, इस व्यवस्था ने आगे बढ़कर पहल की और शांति का संदेश दिया।


 

 

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