श्री राम कथा सत्ता की त्याग की कथा है : योगी योगेश्वर जी महाराज



  

गढ़वा : सदर गढवा लोटो काली मंदिर के प्रांगण मे शतचंडी महायज्ञ के अंतिम दिन योगी सेना के तत्वावधान में श्री राम कथा रुपी अमृत परवाहित हो रही हैं। प्रवचन कर्ता सुरेश शास्त्री ने कहा कि राम कथा सत्ता की संघर्ष की कथा है। कथा के क्रम को आगे बढाते हुए कहा कि राम जी का जन्म दिन मे बारह बजे हुआ तो कृष्ण जी का जन्म बारह बजे रात मे हुआ राम जी ने एक नदी का चयन किया सरयू कृष्ण भी नदी का चयन किया यमुना राम जी ने एक वन का चयन किया चित्रकूट कृष्ण जी एक वन का चयन किया वृंदावन राम जी ने सर्व प्रथम एक राक्षसी का बध किया। राम जी ने एक मित्र बनाया सुग्रीव, कृष्ण ने मित्र बनाया सुदामा अंत मे राम जी ने एक राक्षस का बध किया रावण, कृष्ण ने भी एक राक्षस का बध किया कंश राम कथा चार अक्षरों में आती हैं। रामायण कृष्ण कथा भी चार अक्षरों मे आती है भागवत अंतर यही हैं कि राम कथा सत्ता के त्याग की कथा है और श्री कृष्ण कथा सत्ता के लिए संघर्ष की कथा है। उन्होंने ने कहा कि भक्त नही होते तो भगवान कहा होता तेरी -मेरी समस्या का समाधान कहा होता। वहीं सुश्री रुपा पान्डेय ने कहा कि भगवान अवतार भी लिए और जन्म भी लिए और प्रगट भी हुए। अंत मे योगी सेना प्रदेश अध्यक्ष बिपुल धर दुबे ने गयान मंच का समापन समारोह मे बाहर से आए सभी विद्वानों को अंग वस्त्र देकर गयान मंच का समापन किया गया। मौके पर हृषिकेश पान्डेय, नरेन्द्र कुमार तिवारी, रविन्द्र तिवारी, रोहित मिश्रा, अमित धर दुबे, अतुलधर दुबे, अरूण दुबे, रामजतन विश्वकर्मा, जगेश्वर पाल, अतुल दुबे, मनोज पाल, संदीप पाल, विशाल सिंह, मार्कन्डेय तिवारी, प्रियांशु दुबे, लालचंद विश्वकर्मा, अमल तिवारी, हरिशंकर दुबे, रोहित दुबे, भर्दुल राम, चंदन तिवारी, अरविंद धर दुबे, सोनाधर दुबे, विनोद दुबे सहित बड़ी संख्या श्रद्धालुओं मौजूद थे।


 

 

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