भगवान राम उदारता के तो भैया भरत त्याग के प्रतिमूर्ति हैं : अखिलेश्वरी



  

श्री बंशीधर नगर : मानस माधुरी अखिलेश्वरी शर्मा ने कहा कि भगवान राम उदारता के तो भैया भरत त्याग के प्रतिमूर्ति हैं। वह श्रीरामचरित मानस समिति चितविश्राम के तत्वावधान में वासंतिक नवरात्र के मौके पर आयोजित श्रीराम कथा के विश्राम दिवस पर प्रचवन कर रही थी। उन्होंने कहा कि राम और भरत भारतीयों के दिलों में बसते हैं। अगर आज के दौर में भी स्वार्थ, लिप्सा एवं भौतिकता के युग में छल, कपट एवं अहम के बावजूद अगर रिश्तो का सम्मान बचा है तो वह राम और भरत के आचरण के कारण, जो उदारता और त्याग के उदाहरण हैं। मानस माधुरी अखिलेश्वरी शर्मा ने कहा कि अपने वचनों के पालन के लिये पिता ने राम के स्थान पर भरत को राज्य सौंपा राम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुये वन गमन को चुना। वहीं भरत राज्य पर अपने बड़े भ्राता राम का ही अधिकार मानते हैं और वन में चित्रकूट में जाकर राम से राज्य स्वीकार करने का आग्रह करते हैं। बड़ों के प्रति सम्मान एवं त्याग का भाव एवं छोटों के प्रति उदारता यदि आज भारत में है तो वह भरत के कारण है। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस ही हमें पुत्र, भाई,मित्र हर रिश्ते के आदर्श को सिखाता है, जो आज के परिवेश में अत्यधिक प्रासंगिक है। मानस माधुरी ने कहा कि भरत का चरित्र का वर्णन महाज्ञानी जनक जी स्वयं सरस्वती करने में अपने आप को असमर्थ पाई तो एक अदना साव्यक्ति भरत के चरित्र की थाह क्या लगा पायेगा। स्वयं भरत को जन्म देने वाली मां कैकई जब भरत को नहीं जान सकी भैया भरत ने अपने बड़े भ्राता राम के लिये अपनी मां कैकई तक का त्याग कर दिया जिस राज्य को राजगद्दी को कैकई ने भरत के लिये मांगा था, भरत ने उसे तिनके के बराबर समझा और चरणपादुका सिंहासन पर रखकर भाई के आगमन के तक स्वयं महात्मा का जीवन यापन किया। विश्राम दिवस पर मानस माधुरी ने कहा न केवल चितविश्राम के लोगों ने बल्कि संपूर्ण श्री बंशीधर नगर क्षेत्र के लोगों ने मुझे पहले भी जो स्रेह दिया और आज भी मैं यहां आकर अपने आप को खुशनसीब समझती हूं कि बाबा बंशीधर की छाया जहां हो वहां व्यासपीठ से कुछ बोलने का अवसर मिला। अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष तेजप्रताप पांडेय ने सुदूर गांव से आये हुये सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुये कहा की अखिलेश्वरी जी के मुखारविंद में स्वयं मां सरस्वती विराजित हैं। जिस तरह से रामचरित मानस आपसी प्रेम का संदेश देता है उसी तरह इस क्षेत्र के लोगों ने मानस माधुरी के कथा को सब कुछ भुला कर इस भागदौड़ की जीवन में पूरे तन्मयता के साथ सुना। संचालन कमलेश पांडेय ने किया। उस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।


 

 

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